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विद्युत शवदाह गृह की एक मशीन महीनों से बंद, दूसरी में लग रहा समय ज्यादा
उज्जैन।वर्षों पूर्व नगर निगम द्वारा लोगों की सुविधा के लिये विद्युत शवदाह गृह का निर्माण कराया गया था। शुरुआत में यहां अंतिम संस्कार का 300 रुपये शुल्क लिया जाता था लेकिन वर्ष 1980 के बाद शुल्क घटाकर मात्र 1 रुपया कर दिया गया, लेकिन यहां मशीनों का मेंटेनेंस नहीं होने के कारण एक मशीन हमेशा बंद ही रहती है जिससे लोगों को मिलने वाली सुविधा में कमी आ रही है। खास बात यह कि लकड़ी कंडे से शवों के अंतिम संस्कार में तीन हजार रुपये तक का खर्च वहन करना पड़ता है।
विद्युत शवदाह गृह के कर्मचारी घासीराम भाटी ने बताया कि प्रतिदिन 2-3 शवों का अंतिम संस्कार मशीन द्वारा किया जाता है। इसके बदले मात्र 1 रुपये शुल्क लिया जाता है। यहां शवों के अंतिम संस्कार के लिये 2 मशीनें उपलब्ध हैं, लेकिन एक मशीन वर्तमान में चल रही है। दूसरी मशीन की क्वाइल जल जाने के कारण एक माह से बंद पड़ी है।
भाटी के अनुसार विद्युत शवदाह गृह में शवों का अंतिम संस्कार करने के प्रति लोग जागरूक होते जा रहे हैं, लेकिन एक मशीन बंद रहने के कारण असुविधा होती है, एक शव के अंतिम संस्कार में करीब 2 घंटे से अधिक समय लगता है।
सिस्टम के अनुसार शव की राख पर पर्ची लगाकर परिजनों को दूसरे या तीसरे दिन सुपुर्द कर दी जाती है। भाटी ने बताया कि यदि नगर निगम द्वारा शुल्क में वृद्धि कर दी जाती है तो मशीनों का मेंटेनेंस आसानी से होगा और यहां सुविधाएं भी बढ़ाई जा सकती है।
मशीन चालू नहीं हो पाई
नगर निगम द्वारा शवदाह के लिये गैस द्वारा संचालित होने वाली मशीन त्रिवेणी श्मशान घाट पर स्थापित की गई है, लेकिन शवदाह के लिये गैस का उपयोग करने पर अत्यधिक खर्च आने के कारण इसे अब तक विधिवत तरीके से चालू नहीं किया गया है।
वॉटर कूलर की हालत खराब
विद्युत शवदाह गृह के ठीक सामने शोकसभा हॉल का निर्माण किया गया है जिसमें 200 से अधिक लोगों के बैठने की क्षमता है। यहां लोगों को पीने के पानी की सुविधा के लिये एक संस्था द्वारा वाटर कूलर लगाया गया लेकिन यह खराब हो चुका है इस कारण पीने के पानी की भी समस्या है।